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- 19 साल बाद शहर में कदम...

कोलकाता। बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन करीब 19 साल बाद शुक्रवार को कोलकाता लौटीं। लंबे समय बाद शहर में कदम रखते ही वह भावुक हो गईं और अपनी वापसी को घर लौटने जैसा बताया। तस्लीमा नसरीन ने कहा कि उन्होंने कभी अपनी इच्छा से कोलकाता नहीं छोड़ा था और लंबे समय से उन्हें उम्मीद थी कि एक दिन वह दोबारा इस शहर में लौट सकेंगी।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद 63 वर्षीय लेखिका ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कोलकाता आकर उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा कि यह वापसी उनके लिए बेहद भावनात्मक पल है। उन्होंने बताया कि वह कभी अपनी मर्जी से इस शहर से दूर नहीं हुई थीं, बल्कि परिस्थितियों के कारण उन्हें यहां से जाना पड़ा था।
तस्लीमा नसरीन ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक कोलकाता लौटने की उम्मीद बनाए रखी। समय बीतता गया, सरकारें बदलीं, लेकिन उनके लिए वापसी के रास्ते बंद रहे। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी थी कि एक दिन वह फिर से कोलकाता आ पाएंगी।
दरअसल, वर्ष 2007 में तस्लीमा नसरीन की किताब को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्हें कोलकाता छोड़ना पड़ा था। उस समय उनकी मौजूदगी को लेकर कई संगठनों ने विरोध जताया था। इसके बाद सुरक्षा कारणों से उन्हें पश्चिम बंगाल से बाहर जाना पड़ा था। तब से वह भारत में रह रही हैं और लंबे समय से दिल्ली में रेजिडेंस परमिट पर रह रही हैं।
तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी एक विशेष कार्यक्रम के सिलसिले में हुई है। वह 1 अगस्त को रवींद्र सदन में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में शामिल होंगी। यह कार्यक्रम कट्टरपंथ के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी और प्रसिद्ध लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय समेत कई प्रमुख लोग शामिल हो सकते हैं।
इस दौरान तस्लीमा नसरीन अपने सम्मान में आयोजित नागरिक स्वागत समारोह में कुछ कविताएं भी सुनाएंगी और लोगों से संवाद करेंगी। उनके समर्थकों का कहना है कि लंबे अंतराल के बाद उनका कोलकाता आना साहित्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण घटना है।
तस्लीमा नसरीन की वापसी के साथ ही पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक अखरुज्जमां ने उनकी वापसी को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तस्लीमा नसरीन अक्सर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयान देती हैं और इसी वजह से भाजपा उनका समर्थन कर रही है।
वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने तस्लीमा नसरीन की वापसी का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान उन्हें कोलकाता वापस आने का अवसर नहीं मिला था, लेकिन अब परिस्थितियां बदली हैं। उन्होंने कहा कि तस्लीमा नसरीन का कोलकाता आना गर्व की बात है।
तस्लीमा नसरीन मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली हैं और अपने लेखन के लिए दुनियाभर में जानी जाती हैं। उनके लेखन में महिलाओं के अधिकार, धार्मिक कट्टरता और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर विचार रखे गए हैं। उनके विचारों को लेकर समय-समय पर विवाद भी होते रहे हैं।
कोलकाता उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उन्होंने कई वर्षों तक इस शहर में रहकर लेखन किया और बंगाली साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाई। यही कारण है कि वह कोलकाता को अपने लिए खास स्थान मानती हैं।
फिलहाल तस्लीमा नसरीन की वापसी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। जहां उनके समर्थक इसे भावनात्मक घर वापसी बता रहे हैं, वहीं कुछ राजनीतिक दलों ने उनके पुराने बयानों को लेकर सवाल उठाए हैं। 19 साल बाद कोलकाता पहुंची तस्लीमा नसरीन अब अपने आगामी कार्यक्रम में शामिल होंगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।





